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आखिर हत्यारा कौन, क्राइम ब्रांच मौन

काश ! भगवान या अल्लाह ने अगर मर कर परलोक अथवा जन्नत में चले जाने वाले लोगों को भी बोलने का हक दिया होता, तो मरने से पहले उन लोगों के साथ किसने क्या किया, यह सब बता पाते तो मुझे यकीन है हीरानगर की बच्ची भी अब अपनी लम्बी निद्रा से जाग जाती। बच्ची भारत की न्याय-व्यवस्था की आंख में आंख डालकर पूछती कि ऐसी घटिया मौत भले ही खुदा ने मेरे लिए रची थी, पर क्या यह भारत की कानून-व्यवस्था की हार नहीं है कि मेरे हत्यारे का सुराग अभी तक किसी के पास नहीं! क्यों जम्मू-कश्मीर राज्य के आला दिमाग अफसर आरोपियों का सुराग लगाने नाकाम रहे ? क्यों क्राइम ब्रांच के आला अधिकारी उसके कातिल का चेहरा बेनकाब न कर सकी? इसके साथ ही बच्ची जांच करने वाले अधिकारियों से पूछती की आखिर करीब 2 महीनें गुजर जाने के बाद भी किसी आरोपी की पहचान नहीं कर पाए हो तो क्यों ना अपनी योग्यता की पोल खोल देते हो? हीरानगर की कूटा पंचायत के रसाना गांव की आठ वर्षीय बच्ची की हत्या संसार के सबसे बडे़ लोकतंत्र को अराजक और अनैतिक भीड़तंत्र भी साबित करती है।  



18 जनवरी को मिला शव, पर अभी नहीं मिला आरोपी

आप सब जानते हैं कि हमारे सामने 10 जनवरी 2018 को जम्मू संभाग के कठुआ जिला के रसाना गांव की की बच्ची जो मवेशियों को चराने गई थी, वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो जाती है। आठवें दिन यानी 18 जनवरी को पास के जंगल में उसका शव बरामद होता है। प्रारम्भिक जांच में बच्ची के साथ दुष्कर्म होने की बात सामने आती है। उसका अपहरण किसने किया, किसने दुष्कर्म किया, उसे किसने मारा अभी तफ्तीश जारी है। कुछ दिनों बाद पुलिस ने शक के आधार पर एक नाबालिग को को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन लोगों ने आरोप लगाया कि जिस नाबालिग को गिरफ्तार किया है, उसका इस घटना में कोई हाथ नहीं है। लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया कि इस मामले की जांच की जाए। पहले स्थानीय स्तर पर पुलिस जांच करती है। उसके बाद एसआइटी (विशेष जांच टीम) का गठन किया जाता। और बाद में मामले को क्राइम ब्रांच को सौंपा जाता है, लेकिन करीब एक माह की जांच के बाद भी क्राइम ब्रांच के हाथ खाली हैं। क्राइम ब्रांच के अधिकारी बीच-बीच में रसाना गांव में जाकर वहां के युवाओं को हिरासत में लेती है। पूछताछ करती है, लेकिन फिर भी कोई सुराग हत्यारे का नहीं मिलता है। बार-बार जांच अधिकारियों के गांव में जाकर युवाओं को हिरासत में लेने के कारण और मामले का कोई सुराग नहीं मिलने पर लोगों में गुस्सा भड़क गया है। लड़की समुदाय विशेष से संबंध रखती थी, जिन लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है, हिन्दू धर्म से संबंधित हैं। 


आखिर क्यों नहीं हो रही सीबीआई जांच

लोग अब आरोप लगा रहे हैं कि क्राइम ब्रांच की जांच टीम में शामिल अधिकारी भी समुदाय विशेष से संबंध रखते हैं, जो मुख्यमंत्री के इशारे पर हिन्दुओं को निशाना बना रहे हैं, और हिन्दुओं के बच्चों को ही गिरफ्तार कर रहे हैं। ऐसे में हिन्दू समुदाय के लोगों ने हिन्दू एकता मंच बनाया और मामले को सीबीआइ के सौंपने की मांग रखी, लेकिन राज्य सरकार इस पर कोई विचार नहीं कर रही है। रसाना गांव के लोग एक बार तो गांव से पूरी तरह से पलायन भी कर चुके हैं। पलायन के दूसरे दिन राज्य सरकार के मंत्री गांव के लोगों के साथ मिलते हैं। वह लोगों को आश्वासन देते हैं कि मामले की सीबीआइ जांच करवाने के लिए मुख्यमंत्री से बात की जाएगी, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो सका है। लोगों में मामले को लेकर लगातार गुस्सा बढ़ रहा है। लोगों की मांग पर सरकार को भी कदम उठाने की जहमत उठानी चाहिए कि मामले को सीबीआइ को सौंप दे, क्योंकि करीब दो माह में स्थानीय जांच एजेंसियां अभी तक मामले की तह तक नहीं पहुंच पाई है। सीबीआइ भी सरकार की ही एजेंसी है, जिसको भी लोगों के लिए ही बनाया गया है। ऐसे में सरकार को उससे मदद लेने में किसी प्रकार का संकोच नहीं होना चाहिए।

मुर्दों की आत्माएं बोला नहीं करती

अब तक हुई जांच पर सवाल उठता है कि कहीं कुछ ऐसा है, जो दबा है या दबा दिया गया है अथवा दबाया जा रहा है। क्या कोई षड्यंत्र रचा गया ? या, पुलिस और क्राइम ब्रांच जांच करने में अक्षम हैं? या, कहीं और चूक हो रही है जो अभी तक मामले की जांच ही पूरी नहीं हो पाई है? यह सवाल फिर से फन फैलाकर समूची व्यवस्था पर फुफकार रहा है कि आखिर बच्ची का कातिल कौन? अब इस किंवदंती बनते हुए रहस्य पर से अगर कोई परदा उठा सकता है, तो वे खुद बच्ची है । मगर करें क्या, मुर्दों की आत्माएं बोला नहीं करती। 

इस मामले में जो कुछ भी रहा है वह किसी भी रूप में सही नहीं ठहराया जा सकता है। इस मामले का राजनीतिकरण और सांप्रदायीकरण किया जा रहा है। किसी भी हत्या अथवा कुकृत्य के मामले में न तो राजनीति होनी चाहिए और न ही ऐसे मामलों को धर्म और समुदाय के आधार देखना चाहिए। ऐसी घटनाएं किसी धर्म अथवा जाति को नहीं बल्कि पूरे समाज को कलंकित करती हैं। ऐसे घटनाओं को किसी भी कीमत पर रोका जाना चाहिए।

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